NMPB के 25 वर्ष: औषधीय पौधों पर ‘चिंतन शिविर’ कल | News

औषधीय पौधों पर ऐतिहासिक ‘चिंतन शिविर’: NMPB के 25 वर्ष पूरे, कल विज्ञान भवन में जुटेंगे दिग्गज, मंत्री प्रतापराव जाधव करेंगे उद्घाटन
भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की रीढ़ माने जाने वाले औषधीय पौधों (Medicinal Plants) के क्षेत्र में कल एक नया अध्याय लिखा जाएगा। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय अपनी स्थापना के 25 गौरवशाली वर्ष (रजत जयंती) पूरे होने के उपलक्ष्य में कल, यानी 11 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में एक भव्य ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन कर रहा है।
इस महामंथन का उद्देश्य देश में औषधीय पादप क्षेत्र की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना और अगले 25 वर्षों के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करना है। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 9:00 बजे होगा।
मुख्य विषय: खेती से लेकर बाजार तक
इस एक दिवसीय चिंतन शिविर की थीम बेहद प्रासंगिक रखी गई है – “औषधीय पादपों में नए रुझान – खेती, संरक्षण, बाजार संपर्क और सतत उपयोग को मजबूत बनाना”। इसका सीधा अर्थ है कि अब सरकार का फोकस केवल पौधों को बचाने पर ही नहीं, बल्कि उन्हें किसानों की आय का जरिया बनाने और वैश्विक बाजार तक पहुँचाने पर है।
मुख्य अतिथि और गणमान्य उपस्थिति
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में श्री प्रतापराव जाधव, माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय करेंगे।
इस शिविर में नीति निर्माता, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, किसान, उद्योग जगत के प्रतिनिधि (Ayurveda Industry) और अन्य हितधारक एक मंच पर आएंगे। यह समागम औषधीय पौधों की पूरी वैल्यू चेन (Value Chain) को एकीकृत करने का प्रयास है।
चर्चा के प्रमुख बिंदु (Key Discussion Points)
विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सत्रों और पैनल चर्चाओं में निम्नलिखित मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा:
- नवाचार (Innovation): औषधीय पादपों की खेती और उत्पादन में नई तकनीकों का प्रयोग।
- संरक्षण (Conservation): लुप्तप्राय जड़ी-बूटियों और जैव-विविधता को बचाने की रणनीतियाँ।
- बाजार संपर्क (Market Linkage): किसानों को सीधे उद्योग से जोड़ना और निर्यात (Export) को बढ़ावा देना।
- नीति और कार्यान्वयन: सतत उपयोग (Sustainable Use) सुनिश्चित करने वाली नीतियां बनाना।
NMPB के 25 साल: एक मील का पत्थर
आयुष मंत्रालय का मानना है कि NMPB के 25 वर्षों की यह यात्रा भारत के औषधीय पादप पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने में अहम रही है। यह शिविर उसी दिशा में अगला बड़ा कदम है।
“यह चिंतन शिविर औषधीय पादप क्षेत्र में स्थिरता, नवाचार और समावेशी विकास को बढ़ावा देगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी हमारी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को भी मजबूती मिलेगी।”
— आयुष मंत्रालय, भारत सरकार
निष्कर्ष
विज्ञान भवन में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जहाँ हमारी वनस्पति संपदा (Green Gold) देश की आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बनेगी।
रिपोर्ट: आयुष्य पथ डिजिटल डेस्क | स्थान: विज्ञान भवन, नई दिल्ली

