Top News

ICMR रिपोर्ट: भारत में हर 7 में से 1 स्ट्रोक मरीज युवा है | Ayushya Path

युवाओं में स्ट्रोक का खतरा: ICMR की वेक-अप कॉल | आयुष्य पथ
विशेष स्वास्थ्य रिपोर्ट

सावधान! अब युवाओं को निशाना बना रहा है ‘स्ट्रोक’: ICMR की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

भारत में स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक डरावनी तस्वीर उभर रही है। जो स्ट्रोक (Brain Stroke) कभी केवल बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, वह अब देश की युवा आबादी को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। Indian Council of Medical Research (ICMR) के नेशनल स्ट्रोक रजिस्ट्री प्रोग्राम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर 7 में से 1 स्ट्रोक मरीज 45 साल से कम उम्र का है।

13.8% भारत में कुल स्ट्रोक मरीजों में युवाओं (45 से कम) की हिस्सेदारी

यह वैश्विक औसत (10% से कम) की तुलना में कहीं अधिक चिंताजनक है।

30 अस्पतालों के लगभग 35,000 मामलों के विश्लेषण पर आधारित यह शोध हाल ही में International Journal of Stroke में प्रकाशित हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि औसत स्ट्रोक मरीज की उम्र भले ही 59.4 साल है, लेकिन युवाओं का बढ़ता आंकड़ा एक ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ की ओर इशारा कर रहा है।

युवाओं में स्ट्रोक के 5 सबसे बड़े रिस्क फैक्टर्स

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली और अनियंत्रित तनाव युवाओं के दिमाग की नसों को समय से पहले कमजोर कर रहे हैं:

🩸 हाइपरटेंशन (सबसे बड़ा हत्यारा)

कुल स्ट्रोक मरीजों में 74.5% हाई ब्लड प्रेशर के शिकार थे। युवाओं में यह अक्सर जांच न होने के कारण छिपा रहता है।

🍬 अनियंत्रित डायबिटीज

27.3% मरीजों में डायबिटीज पाई गई। भारत की “डायबिटीज कैपिटल” छवि युवाओं की धमनियों (Arteries) को डैमेज कर रही है।

🚬 तंबाकू और धूम्रपान

28.5% मरीज तंबाकू और 22.6% स्मोकिंग के आदि थे। युवा पुरुषों में स्ट्रोक का यह एक प्रमुख कारण है।

📉 शहरी तनाव और मोटापा

नींद की कमी, जंक फूड और स्मार्टफोन एडिक्शन कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाते हैं, जो सीधा स्ट्रोक का खतरा पैदा करता है।

स्ट्रोक के प्रकार और युवाओं पर प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 60% मामले इसकेमिक स्ट्रोक (खून का थक्का जमना) के होते हैं, जबकि शेष हेमरेजिक स्ट्रोक (नसों का फटना) के। युवाओं में स्ट्रोक केवल शारीरिक अक्षमता नहीं लाता, बल्कि परिवार पर आर्थिक बोझ और लंबे समय तक दिव्यांगता (पैरालिसिस, बोलने में समस्या) का कारण बनता है। चिंता की बात यह है कि कई मरीज अस्पताल पहुँचने में 24 घंटे से ज्यादा की देरी कर देते हैं।

🚨 FAST टेस्ट: स्ट्रोक की पहचान के 4 सूत्र
F – Face drooping (चेहरा एक तरफ झुकना)
A – Arm weakness (एक हाथ में कमजोरी या सुन्नपन)
S – Speech difficulty (बोलने में लड़खड़ाहट)
T – Time (तुरंत एम्बुलेंस बुलाने का समय)
🌿 आयुष्य पथ विशेषज्ञ सलाह: 80% स्ट्रोक रोके जा सकते हैं

युवाओं के लिए प्रिवेंशन प्रोटोकॉल:

  • नियमित जांच: 30 साल की उम्र के बाद हर 6 महीने में BP और शुगर चेक करवाएं।
  • हिताहार (संतुलित डाइट): प्रोसेस्ड फूड छोड़ें। आयुर्वेद के अनुसार हल्दी-दूध और अदरक का सेवन इन्फ्लेमेशन कम करता है।
  • विहार (नियमित व्यायाम): रोज 45 मिनट ब्रिस्क वॉक या योग (अनुलोम-विलोम प्राणायाम) को जीवन का हिस्सा बनाएं।
  • तनाव प्रबंधन: 7-8 घंटे की गहरी नींद लें और स्मार्टफोन एडिक्शन से बचें।
  • नशा मुक्ति: तंबाकू और अल्कोहल का पूरी तरह त्याग करें।

निष्कर्ष

ICMR की यह रिपोर्ट केवल आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे समाज के लिए एक वेक-अप कॉल है। भारत की ‘युवा शक्ति’ अगर स्ट्रोक जैसी बीमारियों की गिरफ्त में आ जाएगी, तो देश का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। हिताहार-विहार और जागरूकता ही वह ढाल है जो युवाओं को इस मष्तिष्क आघात से बचा सकती है।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह रिपोर्ट ICMR और नेशनल स्ट्रोक रजिस्ट्री के आंकड़ों पर आधारित है। स्ट्रोक के किसी भी लक्षण पर तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें। आयुष्य पथ किसी भी चिकित्सकीय निर्णय के लिए उत्तरदायी नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *