क्लाइमेट चेंज और स्वास्थ्य: भारत ने अमेरिका-चीन को पछाड़ा
आयुष्य पथ – पर्यावरण एवं स्वास्थ्य विशेष
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और पब्लिक हेल्थ
क्लाइमेट चेंज और स्वास्थ्य: भारतीय मीडिया ने अमेरिका और चीन को पछाड़ा, ‘द लैंसेट’ की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
नई दिल्ली | 05 मार्च, 2026 | रिपोर्ट: आयुष्य पथ ब्यूरो
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह एक गंभीर ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट’ (Public Health Crisis) बन चुका है। हाल ही में विश्व प्रसिद्ध The Lancet Planetary Health में प्रकाशित एक प्रमुख अध्ययन ने खुलासा किया है कि ‘क्लाइमेट चेंज’ को ‘स्वास्थ्य’ से जोड़कर लोगों को जागरूक करने में भारतीय मीडिया ने अमेरिका और चीन जैसे विकसित देशों को काफी पीछे छोड़ दिया है।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष: भारत की बेहतर ‘फ्रेमिंग’
यह अध्ययन दुनिया के तीन सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों (भारत, अमेरिका, चीन) के न्यूज़ कवरेज पर आधारित है। इसमें IIM बैंगलोर की प्रोफेसर दीप्ति गणपति सहित अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम शामिल थी。
- भारत सबसे आगे: जहाँ भी क्लाइमेट और स्वास्थ्य का जिक्र हुआ, वहाँ 46.4% भारतीय आर्टिकल्स ने इसे ‘पब्लिक हेल्थ लेंस’ से देखा
- अमेरिका और चीन पिछड़े: इस मामले में अमेरिका (31.3%) और चीन (केवल 17%) भारत से काफी पीछे रहे
- चिंता का विषय: तीनों देशों में कुल प्रकाशित आर्टिकल्स में से 0.1% से भी कम में ही क्लाइमेट चेंज को स्वास्थ्य से जोड़कर चर्चा की गई है, जो दर्शाता है कि अभी भी इस दिशा में बहुत काम करने की जरूरत है
भारत में क्लाइमेट चेंज के विनाशकारी स्वास्थ्य प्रभाव
(Lancet Countdown on Health and Climate Change 2025 रिपोर्ट के अनुसार)
| खतरा | स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव |
|---|---|
| एक्सट्रीम हीट (भीषण गर्मी) | 2024 में प्रति व्यक्ति औसतन 19.8 हीटवेव डेज। डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक बढ़ा। लेबर कैपेसिटी लॉस से US$194 बिलियन का आर्थिक नुकसान। |
| एयर पॉल्यूशन | PM2.5 एक्सपोजर से श्वसन रोग (Asthma), हृदय रोग और प्रारंभिक मौतें। |
| फ्लड्स और एक्सट्रीम वेदर | डेंगू, मलेरिया जैसी वेक्टर-बोर्न बीमारियों में भारी वृद्धि। |
| फूड इनसिक्योरिटी | फसलें खराब होने से कुपोषण (Malnutrition) और बच्चों में स्टंटिंग का खतरा। |
निष्कर्ष: ‘क्लाइमेट एक्शन’ ही है स्वास्थ्य की ‘लाइफलाइन’
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि हम क्लाइमेट चेंज को एक ‘स्वास्थ्य संकट’ के रूप में देखेंगे, तो जन-जागरूकता और सरकारी नीतियां अधिक तेजी से काम करेंगी। भारतीय मीडिया (जैसे TOI आदि) द्वारा रोजमर्रा की जिंदगी—हीटवेव, एयर क्वालिटी और फूड सिक्योरिटी—से जोड़कर की जा रही रिपोर्टिंग एक बेहद सकारात्मक कदम है, लेकिन इसकी गहराई और फ्रीक्वेंसी बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है。
आधिकारिक संदर्भ (Official References):
- The Lancet Planetary Health Study: Weathers, M. R., Ganapathy, D., et al. (2025). “The evolution of news coverage about climate change as a health issue: A decadal analysis in China, India, and the USA.”
DOI Link: 10.1016/j.lanplh.2025.101335 - The Lancet Countdown 2025: “The 2025 report of the Lancet Countdown on health and climate change.”
“पृथ्वी का बढ़ता तापमान केवल ग्लेशियर नहीं पिघला रहा, यह हमारे शरीर को भी अंदर से बीमार कर रहा है।”

