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प्रदूषण और ठंड का ‘डबल अटैक’? घबराएं नहीं, आयुष मंत्रालय ने बताए 4 ‘रामबाण’ घरेलू उपाय | Winter Health

प्रदूषण और ठंड का ‘डबल अटैक’? घबराएं नहीं, आयुष मंत्रालय ने बताए 4 ‘रामबाण’ घरेलू उपाय | Winter Health Guide

प्रदूषण और ठंड का ‘डबल अटैक’? घबराएं नहीं, आयुष मंत्रालय ने बताए 4 ‘रामबाण’ घरेलू उपाय

उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड के साथ-साथ वायु प्रदूषण (Air Pollution) भी अपने चरम पर है। ठंडी हवा और पीएम 2.5 (PM 2.5) के कण मिलकर हमारे श्वसन तंत्र (Respiratory System) पर गहरा प्रहार कर रहे हैं। खांसी, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ होना आम हो गया है।

इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने आज एक एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय का कहना है कि “जटिल दवाओं की नहीं, बल्कि सही दिनचर्या और घरेलू नुस्खों की जरूरत है।”

मंत्रालय द्वारा सुझाए गए 4 प्रमुख उपाय

आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया के जरिए ‘Breathe Better’ अभियान के तहत ये सरल उपाय साझा किए हैं:

1. नमक के पानी के गरारे (Saline Gargles) प्रदूषण के कण गले में चिपककर इन्फेक्शन पैदा करते हैं। दिन में 2-3 बार गुनगुने पानी में नमक मिलाकर गरारे करें। यह गले की सूजन और खराश को तुरंत कम करता है।
2. ‘हर्बल चाय’ का सुरक्षा कवच अदरक, तुलसी की पत्तियां और काली मिर्च—इन तीनों को पानी में उबालकर चाय (काढ़ा) बनाएं।
लाभ: यह बलगम को पतला करती है, फेफड़ों को डिटॉक्स करती है और इम्यूनिटी बढ़ाती है।
3. भाप चिकित्सा (Steam Inhalation) सांस की नली को साफ करने का सबसे पुराना और प्रभावी तरीका। गुनगुने पानी की भाप लें। यदि इसमें पुदीना, तुलसी या अजवाइन डाल दें, तो यह साइनस और छाती की जकड़न (Congestion) को और तेजी से खोलता है।
🚫 विशेष चेतावनी: घर के अंदर धुआं न करें
मंत्रालय ने सख्त सलाह दी है कि घर के अंदर अगरबत्ती, धूप या कचरा जलाने से बचें। यह ‘इनडोर प्रदूषण’ (Indoor Pollution) को बढ़ाता है, जो बंद कमरे में फेफड़ों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।

अतिरिक्त आयुर्वेदिक टिप्स

🧘 सूर्यभेदन प्राणायाम करें:
दाहिनी नासिका (Right Nostril) से सांस लें और बाईं से छोड़ें। यह शरीर में आंतरिक गर्मी पैदा करता है, जो सर्दियों में कफ और ठंड से लड़ने में मदद करता है। इसके अलावा, खांसी में शहद के साथ पिप्पली चूर्ण का सेवन लाभकारी है।

सर्दियों में प्रदूषण से डरने के बजाय, अपनी दिनचर्या में ये छोटे बदलाव लाएं और स्वस्थ सांस लें।

(स्रोत: आयुष मंत्रालय, आधिकारिक सोशल मीडिया एडवाइजरी – 7 जनवरी 2026)

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