‘सुपरबग’ के खतरे पर आयुष मंत्रालय का ‘रेड अलर्ट’: AMR के खिलाफ छेड़ी मुहिम, जारी किया वीडियो
‘सुपरबग’ के खतरे पर आयुष मंत्रालय का ‘रेड अलर्ट’: AMR के खिलाफ छेड़ी मुहिम, जारी किया वीडियो
नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (01 जनवरी 2026)एंटीबायोटिक्स दवाओं का बेधड़क इस्तेमाल भविष्य में मानव जाति के लिए कितना घातक हो सकता है, इसे लेकर केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है। मंत्रालय ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य संकट मानते हुए जनता को सचेत किया है।
इस अभियान के तहत मंत्रालय ने एक विशेष एनिमेटेड वीडियो जारी किया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
‘मैन वर्सेज सुपरबग’: क्या है वीडियो का संदेश?
मंत्रालय द्वारा जारी वीडियो की थीम “मैन वर्सेज सुपरबग” (Man Vs Superbug) रखी गई है। इसमें बहुत ही सरल तरीके से समझाया गया है कि:
- कैसे छोटी-मोटी बीमारियों में एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग (Misuse) या अत्यधिक उपयोग (Overuse) बैक्टीरिया को इतना ताकतवर बना देता है कि उस पर दवाओं का असर होना बंद हो जाता है।
- जब दवाएं असर करना बंद कर देती हैं, तो साधारण संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है और इलाज मुश्किल हो जाता है।
मंत्रालय की अपील: ‘बिना डॉक्टर दवा न लें’
आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में जनता से अपील की है कि वे स्व-चिकित्सा (Self-medication) से बचें।
“एंटीबायोटिक्स टॉफी नहीं हैं। इन्हें केवल योग्य डॉक्टर की सलाह पर ही लें और कोर्स पूरा करें। खुद डॉक्टर न बनें, नहीं तो भविष्य अंधकारमय हो सकता है।”
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
इस पहल को प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” विजन के अनुरूप बताया गया है, जहां नागरिकों का स्वास्थ्य और कल्याण (Wellness) सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय का मानना है कि आयुर्वेद और अन्य आयुष पद्धतियां शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाकर एंटीबायोटिक्स पर निर्भरता कम करने में सहायक हो सकती हैं।
अभियान को सोशल मीडिया पर #AMRAwareness हैशटैग के साथ चलाया जा रहा है ताकि युवाओं तक यह संदेश प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
(स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो – PIB, भारत सरकार)

