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डेनमार्क में आयुर्वेद का परचम: AIIA की ‘माइंड बॉडी सोल’ कॉन्फ्रेंस पर विस्तृत रिपोर्ट

Detailed Report: AIIA Expert Represents India at Denmark Wellness Conference

ग्लोबल मंच पर भारत का डंका: डेनमार्क में AIIA ने दिखाई आयुर्वेद की वैज्ञानिक शक्ति – ‘माइंड, बॉडी, सोल’ कॉन्फ्रेंस की विस्तृत रिपोर्ट

नई दिल्ली/कोपेनहेगन, 31 जनवरी 2026 (आयुष्य पथ इंटरनेशनल ब्यूरो): जब भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान का संगम होता है, तो दुनिया उसे न केवल देखती है बल्कि अपनाती भी है। इसी कड़ी में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यूरोप के प्रमुख देश डेनमार्क में भारतीय आयुर्वेद की गूंज सुनाई दी है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले शीर्ष संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली ने डेनमार्क में आयोजित प्रतिष्ठित ‘माइंड, बॉडी, सोल कॉन्फ्रेंस’ (Mind, Body, Soul Conference) में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह आयोजन न केवल एक सम्मेलन था, बल्कि भारतीय ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) का एक सशक्त प्रदर्शन भी था।

आयोजन का उद्देश्य और भव्यता

डेनमार्क में भारतीय दूतावास (Embassy of India in Denmark) द्वारा 30 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन को बढ़ावा देना था। यूरोप में बढ़ रही ‘होलिस्टिक हेल्थ’ (Holistic Health) की मांग को देखते हुए, भारत ने अपनी AYUSH प्रणालियों (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) को एक समाधान के रूप में प्रस्तुत किया।

डॉ. रामावतार शर्मा: प्राचीन ज्ञान को आधुनिक भाषा में समझाया

AIIA की ओर से वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. रामावतार शर्मा ने इस मंच को संभाला। उनका मुख्य व्याख्यान “The Then and Now of Indian Traditional Medicine System” (भारतीय पारंपरिक चिकित्सा: कल और आज) विषय पर केंद्रित था।

अपने विस्तृत संबोधन में डॉ. शर्मा ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

  • ऐतिहासिक धरोहर: कैसे चरक और सुश्रुत जैसे ऋषियों ने हजारों साल पहले सर्जरी और चिकित्सा के जो मानक तय किए थे, वे आज भी प्रासंगिक हैं।
  • वैज्ञानिक प्रमाण (Evidence-Base): उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का आयुर्वेद केवल ‘दादी-नानी के नुस्खों’ तक सीमित नहीं है। AIIA जैसे संस्थान अब हर जड़ी-बूटी और थेरेपी का वैज्ञानिक वैलिडेशन (Scientific Validation) कर रहे हैं, जो इसे पश्चिमी दुनिया के लिए स्वीकार्य बनाता है।
  • एकीकृत चिकित्सा (Integrative Medicine): उन्होंने समझाया कि कैसे एलोपैथी के साथ आयुर्वेद मिलकर (Co-existence) गंभीर रोगों के इलाज में बेहतर परिणाम दे सकता है।

लाइव कंसल्टेशन: डेनमार्क के नागरिकों ने जानी अपनी ‘प्रकृति’

सम्मेलन का सबसे रोमांचक हिस्सा वह था जब डॉ. शर्मा ने मंच से उतरकर लोगों के बीच संवाद किया। उन्होंने लाइव क्लीनिकल कंसल्टेशन सत्र आयोजित किए।

  • विदेशी प्रतिनिधियों ने अपनी नाड़ी (Pulse) दिखायी और अपने वात, पित्त, कफ दोषों के बारे में जाना।
  • यूरोपीय जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं जैसे अनिद्रा (Insomnia), तनाव और पाचन विकारों पर उन्हें तत्काल आयुर्वेदिक समाधान मिले।
  • यह सत्र यह साबित करने में सफल रहा कि आयुर्वेद केवल किताबों में नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी उतना ही प्रभावी है।

‘अतुल्य भारत’ (Incredible India) स्टॉल: संस्कृति की झलक

कार्यक्रम स्थल पर एक विशेष पवेलियन भी सजाया गया था। इसका उद्घाटन डेनमार्क में भारत के राजदूत श्री मानिश प्रभात ने किया।

राजदूत का संदेश: “आयुर्वेद भारत की वह धरोहर है जिसे दुनिया को साझा करना हमारी जिम्मेदारी है। यह कॉन्फ्रेंस भारत और डेनमार्क के बीच स्वास्थ्य और वेलनेस के क्षेत्र में सहयोग के नए दरवाजे खोलेगी।”

स्टॉल पर अश्वगंधा, ब्राह्मी जैसी जड़ी-बूटियों के सैंपल्स, आयुष मंत्रालय के प्रकाशन और योग से जुड़ी जानकारी उपलब्ध थी, जिसने आगंतुकों को खासा आकर्षित किया।

भविष्य के संकेत: आयुष सेक्टर के लिए बड़ी खबर

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिमी देश अब ‘प्रिवेंटिव हेल्थकेयर’ (Preventive Healthcare) की ओर देख रहे हैं, और आयुर्वेद इसमें सबसे आगे है। AIIA का यह प्रयास भारतीय आयुष स्टार्ट-अप्स और दवा निर्माताओं के लिए यूरोप के बाजार में प्रवेश करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

AIIA ने सोशल मीडिया पर इस सफलता को साझा करते हुए लिखा कि यह “Care with Compassion” (करुणा के साथ देखभाल) के उनके आदर्श वाक्य का विस्तार है।


निष्कर्ष

डॉ. रामावतार शर्मा और AIIA की यह भागीदारी महज एक यात्रा नहीं, बल्कि ‘विश्व गुरु’ भारत की उस छवि को मजबूत करती है जो पूरी दुनिया को निरोगी होने का मार्ग दिखा रही है।

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रिपोर्ट: आयुष्य पथ न्यूज डेस्क | स्रोत: AIIA/Ministry of Ayush/Embassy of India

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