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ग्रीष्म ऋतुचर्या: योग, आहार और दालचीनी का शास्त्रोक्त प्रयोग | आयुष्य पथ

ग्रीष्म ऋतुचर्या, योग अभ्यास और NMPB औषधीय ज्ञान | आयुष्य पथ
Day -56 | 100 Days Yoga Countdown | IDY 2026

आयुष्य पथ विशेषांक: ग्रीष्म ऋतुचर्या, योग अभ्यास और NMPB औषधीय ज्ञान

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) के इस 100 दिवसीय संकल्प और काउंटडाउन के 56वें दिन में हम प्रवेश कर चुके हैं। जैसे-जैसे हम योग दिवस के करीब पहुँच रहे हैं, प्रकृति भी अपना रूप बदल रही है। गर्मियां (ग्रीष्म ऋतु) अपने चरम की ओर बढ़ रही हैं। आयुर्वेद और योग शास्त्र के अनुसार, प्रकृति के बदलते चक्र के साथ हमारे शरीर, आहार और योग अभ्यास में भी बदलाव आना अनिवार्य है।

‘आयुष्य पथ’ के आज के इस विशेष लेख में हम जानेंगे कि ग्रीष्म ऋतु में हमारा योग अभ्यास और आहार कैसा होना चाहिए, और साथ ही जानेंगे राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) द्वारा अनुशंसित एक विशेष जड़ी-बूटी ‘दालचीनी’ का योगाभ्यास के बाद कैसे वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग किया जाए।

🌿 भाग 1: ग्रीष्म चर्या – कैसा हो हमारा ग्रीष्मकालीन आहार?

आयुर्वेद के अनुसार ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की किरणें अत्यंत प्रखर होती हैं, जो पृथ्वी और हमारे शरीर से जलीय अंश (कफ) को सोख लेती हैं और वात दोष का संचय शुरू कर देती हैं। इस मौसम में पाचन अग्नि भी मंद पड़ जाती है। इसलिए हमारा आहार ऐसा होना चाहिए जो शरीर को शीतलता दे और पचने में आसान हो।

ग्रीष्मकालीन आहार
  • शीतल और सुपाच्य भोजन: मधुर (मीठे), स्निग्ध (हल्के चिकने), और ठंडी तासीर वाले पदार्थों का सेवन करें। जौ, सत्तू, मूंग दाल, और चावल इस मौसम के लिए उत्तम हैं।
  • हाइड्रेशन (जल तत्व का संतुलन): शरीर में जल तत्व की कमी न होने दें। नारियल पानी, गन्ने का रस, बेल का शरबत, छाछ और ‘आयुष्य मन्दिरम्’ की परंपरा के अनुसार तैयार प्राकृतिक फूलों के अर्क से बना आयुष्य पुष्प-नीर (नेचुरल फ्लोरल रिफ्रेशमेंट ड्रिंक) जैसे शीतल पेयों का नियमित सेवन करें।
  • इनसे बचें: अत्यधिक मसालेदार (कटु), खट्टे (अम्ल), नमकीन (लवण) और गर्म तासीर वाले तामसिक भोजन से पूरी तरह बचें। कटहल, बैंगन और बासी भोजन शरीर में पित्त और वात बढ़ा सकते हैं, अतः इनसे दूर रहें।

🧘‍♀️ भाग 2: ग्रीष्म ऋतु के लिए अनुकूल योग अभ्यास

मौसम के अनुसार योग का अभ्यास भी अनुकूलित होना चाहिए। गर्मियों में अत्यधिक पसीना बहाने वाले या थकाने वाले कठिन आसनों (जैसे सूर्य नमस्कार की बहुत तेज़ और लंबी आवृत्तियाँ) से बचना चाहिए। हमारा उद्देश्य शरीर की आंतरिक गर्मी (पित्त) को शांत करना है।

ग्रीष्म ऋतु योग अभ्यास

1. शांतिदायक आसन: इस मौसम में उन आसनों का अभ्यास बढ़ाएं जो नाड़ी तंत्र को शांत करते हैं और शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं।

  • शशांकासन (Rabbit Pose): यह आसन तनाव कम करता है और मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करता है।
  • पश्चिमोत्तानासन: यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करने और पाचन तंत्र को सुचारू रखने में सहायक है।
  • मकरासन व शवासन: योगाभ्यास के अंत में विश्राम के लिए ये आसन अनिवार्य हैं।

2. शीतली और शीत्कारी प्राणायाम: गर्मियों के लिए ये दोनों प्राणायाम ‘रामबाण’ हैं। जीभ को मोड़कर (शीतली) या दांतों के बीच से (शीत्कारी) श्वास अंदर खींचने से शरीर का तापमान प्राकृतिक रूप से कम होता है, प्यास शांत होती है और उच्च रक्तचाप में लाभ मिलता है। इसके साथ ही चन्द्रभेदी प्राणायाम (केवल बाईं नासिका से श्वास लेना) का अभ्यास भी बहुत लाभकारी है।
(नोट: कपालभाति और भस्त्रिका जैसे ऊष्मा उत्पन्न करने वाले प्राणायामों का अभ्यास इस मौसम में बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए।)

3. हस्त मुद्रा विज्ञान (वरुण मुद्रा): डिहाइड्रेशन से बचने और शरीर में जल तत्व को संतुलित करने के लिए ‘वरुण मुद्रा’ का प्रतिदिन अभ्यास करें। कनिष्ठा (सबसे छोटी उंगली) और अंगूठे के पोरों को हल्का सा मिलाकर रखने से शरीर का रूखापन दूर होता है और त्वचा में चमक आती है。

🌱 भाग 3: योग के बाद NMPB जड़ी-बूटी का प्रयोग – दालचीनी (Cinnamon) का ग्रीष्मकालीन उपयोग

योग अभ्यास के बाद मांसपेशियों की रिकवरी और शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित करने के लिए NMPB (National Medicinal Plants Board) द्वारा अनुशंसित औषधीय पौधों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है। इनमें से एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधि है दालचीनी (Cinnamomum zeylanicum)

दालचीनी का ग्रीष्मकालीन उपयोग

दालचीनी क्यों? दालचीनी एंटी-ऑक्सीडेंट्स (Polyphenols) और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है। योग और स्ट्रेचिंग के बाद मांसपेशियों में होने वाली हल्की सूजन या खिंचाव (Muscle soreness) को दूर करने में दालचीनी बहुत प्रभावी है। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है और मेटाबॉलिज्म को सुचारू रखती है。

ग्रीष्म ऋतु में दालचीनी का सही प्रयोग (Science of Usage): चूंकि दालचीनी की तासीर गर्म (उष्ण) होती है, इसलिए कई लोग गर्मियों में इसे लेने से डरते हैं। लेकिन यदि आयुर्वेद के ‘संयोग’ सिद्धांत का पालन किया जाए, तो गर्मियों में भी इसका अद्भुत लाभ लिया जा सकता है:

  1. योग के बाद कूलिंग इन्फ्यूजन (फांट): योग अभ्यास के लगभग 30-40 मिनट बाद, एक गिलास सामान्य या मटके के ठंडे पानी में मात्र एक चुटकी (लगभग 1-2 ग्राम) शुद्ध दालचीनी का पाउडर और थोड़ा सा शुद्ध शहद या धागे वाली मिश्री मिला लें। मिश्री दालचीनी की उष्णता (गर्मी) को काट देती है और इसके औषधीय गुणों को शरीर में अवशोषित होने देती है।
  2. दालचीनी और दूध: यदि आप सुबह योगाभ्यास के बाद दूध लेते हैं, तो ठंडे या सामान्य तापमान वाले दूध में एक चुटकी दालचीनी पाउडर मिला लें। दूध की शीतलता दालचीनी के साथ मिलकर मांसपेशियों की रिकवरी के लिए बेहतरीन ‘पोस्ट-वर्कआउट ड्रिंक’ का काम करती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (विशेष FAQs)

1. ग्रीष्म ऋतु में योगाभ्यास का सबसे सही समय क्या है?
सबसे उपयुक्त समय सूर्योदय से पहले (ब्रह्म मुहूर्त) या सूर्योदय के तुरंत बाद है जब वातावरण में प्राकृतिक शीतलता होती है। शाम को सूर्यास्त के बाद भी अभ्यास किया जा सकता है।
2. क्या गर्मियों में सूर्य नमस्कार करना वर्जित है?
वर्जित नहीं है, लेकिन इसकी गति धीमी होनी चाहिए। अत्यधिक पसीना आने और हृदय गति बहुत बढ़ने तक इसका अभ्यास न करें। 3-5 चक्र पर्याप्त हैं।
3. दालचीनी की तासीर गर्म होती है, क्या इसे गर्मी में लेना सुरक्षित है?
जी हाँ, यदि इसे मिश्री या शहद के साथ ठंडे पानी/दूध में मात्र एक चुटकी लिया जाए, तो यह पित्त को कुपित किए बिना अपने औषधीय लाभ प्रदान करती है।
4. शीतली प्राणायाम के दौरान क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
जिन्हें सर्दी-खांसी, टॉन्सिल या अस्थमा की गंभीर समस्या है, उन्हें अत्यधिक ठंडे वातावरण में इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। साथ ही, बहुत अधिक प्रदूषण वाली जगह पर जीभ से श्वास न लें।
5. ‘वरुण मुद्रा’ को कितनी देर करना चाहिए?
दिन में 15 से 30 मिनट तक इसका अभ्यास जल संतुलन के लिए पर्याप्त है। इसे किश्तों में (10-10 मिनट) भी किया जा सकता है।
6. क्या गर्मियों में ठंडे पानी से नहाना योगाभ्यास के तुरंत बाद सही है?
कदापि नहीं। योगाभ्यास के बाद शरीर का तापमान बढ़ा हुआ होता है। कम से कम 20-30 मिनट रुकें, जब शरीर का तापमान सामान्य हो जाए, तभी स्नान करें।
7. ग्रीष्म ऋतु में ‘आयुष्य पुष्प-नीर’ ही क्यों?
पुष्प-नीर में गुलाब, गुड़हल और अन्य शीतल फूलों का सत्व होता है जो प्राकृतिक रूप से पित्त शामक होते हैं और बिना किसी केमिकल के शरीर को हाइड्रेट करते हैं।
8. सत्तू का सेवन योग के बाद कैसे करें?
योग के आधे घंटे बाद सत्तू को पानी, भुना जीरा और काला नमक मिलाकर पतले पेय (शरबत) के रूप में लेना सर्वोत्तम है। यह तुरंत ऊर्जा और शीतलता देता है।

निष्कर्ष:

योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, यह प्रकृति के साथ जुड़ने की कला है। NMPB द्वारा बताई गई औषधियों का ज्ञान और आयुर्वेद की ऋतुचर्या को जब योग के साथ जोड़ दिया जाता है, तो हमारा शरीर हर मौसम में निरोगी और ऊर्जावान बना रहता है। आइए, IDY 2026 की इस यात्रा में शास्त्रोक्त पद्धतियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

स्वस्थ रहें, योग करते रहें!

— योगाचार्य सुषमा कुमारी
(योग प्रभारी, आयुष्य मन्दिरम्, रेवाड़ी)

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