आयुष मंत्रालय ने जारी किया NCDs के लिए नया योग प्रोटोकॉल
आयुष मंत्रालय ने NCDs के लिए नया योग प्रोटोकॉल जारी किया, 30–60 मिनट दैनिक अभ्यास की सिफारिश
नई दिल्ली, 30 मार्च 2026 | सार्वजनिक स्वास्थ्य डेस्क | आयुष्य पथ
Ministry of AYUSH ने गैर-संक्रामक रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एक नया समग्र योग प्रोटोकॉल जारी किया है। यह प्रोटोकॉल विशेष रूप से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग और तनाव जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, इस प्रोटोकॉल में प्रतिदिन 30 से 60 मिनट के योग अभ्यास की सिफारिश की गई है, जिसमें आसन, प्राणायाम, ध्यान और विश्राम तकनीकें शामिल हैं।
MDNIY द्वारा विकसित, वैज्ञानिक आधार पर तैयार
यह प्रोटोकॉल मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (Morarji Desai National Institute of Yoga – MDNIY) द्वारा विकसित किया गया है और इसे योग महोत्सव 2026 के दौरान केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किया गया।
मंत्रालय के अनुसार, यह प्रोटोकॉल उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों और क्लिनिकल अध्ययनों पर आधारित है तथा इसे विभिन्न आयु समूहों और स्वास्थ्य स्थितियों के अनुरूप डिज़ाइन किया गया है।
📊 भारत में NCDs: एक बढ़ती चुनौती
विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमानों के अनुसार, भारत में कुल मौतों का लगभग 60–70% हिस्सा गैर-संक्रामक रोगों के कारण होता है। इनमें प्रमुख हैं:
- मधुमेह (Diabetes)
- उच्च रक्तचाप (Hypertension)
- हृदय रोग (Cardiovascular Diseases)
- क्रॉनिक श्वसन रोग (Chronic Respiratory Diseases)
- मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन रोगों का मुख्य कारण असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, नींद की कमी और अनियमित जीवनशैली है।
योग प्रोटोकॉल के मुख्य तत्व
मंत्रालय के अनुसार, यह योग प्रोटोकॉल शरीर और मन के संतुलन पर आधारित है और इसमें निम्न प्रमुख घटक शामिल हैं:
🧘 आसन (Asanas)
विभिन्न योग मुद्राएं, जो शरीर के लचीलेपन और मेटाबॉलिक कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती हैं।
🌬️ प्राणायाम (Pranayama)
अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और अन्य श्वास तकनीकें, जो तनाव कम करने और श्वसन प्रणाली को संतुलित करने में उपयोगी मानी जाती हैं।
🧠 ध्यान (Dhyana)
ध्यान और योग निद्रा जैसी तकनीकें, जो मानसिक तनाव को कम करने और शरीर को गहरा विश्राम देने में सहायक हो सकती हैं।
रोग प्रबंधन में संभावित भूमिका
मंत्रालय के अनुसार, नियमित योग अभ्यास:
- रक्तचाप नियंत्रण में सहायक हो सकता है।
- रक्त शर्करा (Blood Sugar) स्तर के प्रबंधन में मदद कर सकता है।
- मानसिक तनाव को कम करने में योगदान दे सकता है।
- हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट सुझाव है कि योग को चिकित्सा उपचार के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि ‘पूरक’ (Complementary) पद्धति के रूप में अपनाया जाना चाहिए।
📌 इस पहल का राष्ट्रीय महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोटोकॉल भारत में बढ़ते NCD बोझ को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। यदि इसे व्यापक स्तर पर अपनाया जाता है, तो यह:
- Preventive Healthcare मॉडल को मजबूत कर सकता है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव कम कर सकता है।
- जन-जन में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दे सकता है।
यह पहल Ministry of AYUSH द्वारा बढ़ाए जा रहे “Yoga for All” और निवारक स्वास्थ्य दृष्टिकोण के पूर्णतः अनुरूप है। यह देश में चल रही ‘Fit India Movement’ और कार्यस्थलों के लिए ‘Y-Break’ योग प्रोटोकॉल जैसी अन्य पहलों के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।
आगे क्या? (निष्कर्ष)
मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे नियमित योग अभ्यास को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ। विशेषज्ञों का कहना है कि योग को दीर्घकालिक लाभ के लिए निरंतरता के साथ करना आवश्यक है। गैर-संक्रामक रोगों की बढ़ती चुनौती के बीच आयुष मंत्रालय का यह योग प्रोटोकॉल एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक हो सकता है।
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⚠️ अस्वीकरण: यह जानकारी सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। किसी भी विशेष स्वास्थ्य स्थिति (NCDs) में योग प्रोटोकॉल अपनाने से पहले अपने चिकित्सक या प्रमाणित योग विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। योग चिकित्सा का पूरक है, विकल्प नहीं।

