मोटापा 230 बीमारियों की जड़: साहित्य आजतक 2026 में डॉक्टरों की चेतावनी
‘मोटापा 230 बीमारियों की जड़’: साहित्य आजतक 2026 में देश के शीर्ष डॉक्टरों की गंभीर चेतावनी
क्या आपका बढ़ता हुआ वजन सिर्फ आपके कपड़ों का साइज बदल रहा है, या फिर यह भीतर ही भीतर आपके शरीर को खोखला कर रहा है? लखनऊ में आयोजित ‘साहित्य आजतक 2026’ उत्सव के दूसरे दिन (15 फरवरी) एक बेहद महत्वपूर्ण सेशन ‘विन ओवर वेट’ (Win Over Weight) आयोजित किया गया। इस मंच से देश के प्रमुख डॉक्टरों (जिनमें डॉ. राजीव अवस्थी और अन्य विशेषज्ञ शामिल थे) ने मोटापे और डायबिटीज को लेकर एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसे हर भारतीय को गंभीरता से लेना चाहिए।
डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मोटापा (Obesity) कोई साधारण ‘जीवनशैली की समस्या’ या कॉस्मेटिक मुद्दा नहीं है; यह एक गंभीर क्रॉनिक बीमारी (Chronic Disease) है, जो कम से कम 230 अन्य जानलेवा स्वास्थ्य स्थितियों की जड़ बन सकती है।
‘हेल्दी ओबेसिटी’ (Healthy Obesity) एक बहुत बड़ा भ्रम है
अक्सर लोग सोचते हैं कि “मैं मोटा जरूर हूँ, लेकिन मुझे ब्लड प्रेशर या शुगर की बीमारी नहीं है, इसलिए मैं स्वस्थ हूँ।” डॉक्टरों ने इस मिथक को सिरे से खारिज कर दिया। मेडिकल रिसर्च से यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि ‘हेल्दी ओबेसिटी’ जैसा कुछ नहीं होता। भले ही आज आपके मेडिकल टेस्ट नॉर्मल आ रहे हों, लेकिन शरीर पर चढ़ा अतिरिक्त फैट (विशेषकर पेट की चर्बी) भविष्य की महामारियों का साइलेंट किलर है।
मोटापा किन बीमारियों को जन्म देता है?
- मेटाबॉलिक रोग: टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) और हाई ब्लड प्रेशर का सबसे बड़ा कारण।
- हृदय और मस्तिष्क: हार्ट अटैक, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और स्ट्रोक (लकवा) का भारी खतरा।
- कैंसर: मोटापा शरीर में क्रॉनिक सूजन पैदा करता है, जो कोलोरेक्टल (आंत), एंडोमेट्रियल (गर्भाशय) और लिवर कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।
- अन्य गंभीर स्थितियां: फैटी लिवर (Non-alcoholic fatty liver disease), महिलाओं में पीसीओएस (PCOS), हॉर्मोनल असंतुलन और इनफर्टिलिटी (बांझपन)।
द लैंसेट (The Lancet) स्टडी: 925 संक्रामक रोगों का जोखिम
सेशन में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ के एक हालिया और चौंकाने वाले अध्ययन का हवाला दिया गया। फिनलैंड और यूके के 5.4 लाख लोगों पर किए गए इस शोध में पाया गया कि मोटापा केवल हृदय रोग या डायबिटीज ही नहीं लाता, बल्कि यह हमारे इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को इतना कमजोर कर देता है कि व्यक्ति को 925 प्रकार के गंभीर संक्रामक रोगों (Infectious Diseases) का खतरा बढ़ जाता है। (यही कारण था कि कोविड-19 के दौरान मोटे लोगों को सबसे अधिक वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ी थी)।
भारत में मोटापे का अलार्मिंग डेटा (NFHS-5)
भारत तेजी से दुनिया की ‘डायबिटीज और ओबेसिटी कैपिटल’ बनता जा रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़े बेहद डरावने हैं:
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यही रफ्तार रही, तो वर्ष 2050 तक भारत में 17.4% महिलाएं और 12.1% पुरुष ‘गंभीर मोटापे’ (Severe Obesity) का शिकार हो जाएंगे।
बचाव का समग्र (Holistic) मार्ग: क्या करें?
डॉक्टरों ने बताया कि मोटापे का इलाज केवल भूखे रहने से नहीं होता। यह एक क्रॉनिक बीमारी है जिसके लिए सही डाइट, व्यायाम, चिकित्सा (दवा/सर्जरी) और मानसिक संतुलन की आवश्यकता होती है।
- मिताहार और संयम अपनाएं: आयुर्वेद और भगवद्गीता के ‘युक्ताहार विहारस्य’ के सिद्धांत को अपनाएं। पेट को 80% ही भरें (पोर्शन कंट्रोल) और जंक फूड/मीठे से बचें।
- नियमित व्यायाम: रोजाना कम से कम 45 मिनट तेज वॉक (Brisk walk) या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
- योग और प्राणायाम: सूर्य नमस्कार, कपालभाति और सर्वांगासन जैसे योगाभ्यास मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं। वीमेन आयुष्य ऑर्गनाइजेशन (WAO) जैसी संस्थाएं विशेष रूप से महिलाओं में हार्मोनल संतुलन और योग के माध्यम से मोटापा कंट्रोल करने पर शानदार कार्य कर रही हैं।
- मेडिकल हेल्प लें: यदि आपका BMI 30 से ऊपर है, तो इसे केवल डाइट से कम करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या ओबेसिटी एक्सपर्ट से मिलकर दवाओं या बेरियाट्रिक सर्जरी (Bariatric Surgery) के विकल्पों पर विचार करें।
मोटापे को अपनी पहचान या मजबूरी न बनने दें। आज ही संकल्प लें, अपनी जीवनशैली बदलें और उन 230 बीमारियों के दरवाजे अपने शरीर के लिए हमेशा के लिए बंद कर दें।

