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आयुष दवाओं की गुणवत्ता पर ‘डिजिटल पहरा’: e-Aushadhi और ‘आयुष सुरक्षा’ पोर्टल को लेकर गुजरात में बड़ी बैठक

आयुष दवाओं की गुणवत्ता पर ‘डिजिटल पहरा’: e-Aushadhi और ‘आयुष सुरक्षा’ पोर्टल को लेकर गुजरात में बड़ी बैठक | Ayushya Path

आयुष दवाओं की गुणवत्ता पर ‘डिजिटल पहरा’: e-Aushadhi और ‘आयुष सुरक्षा’ पोर्टल को लेकर गुजरात में बड़ी बैठक

आयुष दवाओं की गुणवत्ता (Quality), सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने अपनी डिजिटल पकड़ मजबूत कर दी है। इसी कड़ी में, 9 जनवरी 2026 को गुजरात के गांधीनगर में एक उच्च स्तरीय ‘संवेदनशीलता कार्यक्रम’ (Sensitization Programme) का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम केंद्रीय आयुष मंत्रालय और गुजरात फूड एंड ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (FDCA) का संयुक्त प्रयास था। इसका उद्देश्य देश भर में चल रहे दो प्रमुख डिजिटल पोर्टल्स—e-Aushadhi और Ayush Suraksha—के कार्यान्वयन में आ रही चुनौतियों को दूर करना और उन्हें सुव्यवस्थित (Streamline) करना था।

28 राज्यों का एक मंच पर संगम

इस बैठक का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि इसमें 28 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 70 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनमें राज्य लाइसेंसिंग अथॉरिटी, ड्रग इंस्पेक्टर्स और नोडल ऑफिसर्स शामिल थे। आयुष मंत्रालय की ओर से सलाहकार डॉ. रघु और डॉ. देबाशीष पांडा ने तकनीकी सत्रों का नेतृत्व किया।

जानिए इन दो ‘डिजिटल कवच’ के बारे में

1. e-Aushadhi Portal (ई-औषधि): लाइसेंसिंग का डिजिटल हब
यह पोर्टल आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के लिए एक ‘ऑनलाइन लाइसेंसिंग सिस्टम’ है।
  • काम: दवा निर्माताओं के लाइसेंस आवेदन, रिन्यूअल और ट्रैकिंग को ऑनलाइन करना।
  • फायदा: इससे पारदर्शिता बढ़ी है और लालफीताशाही कम हुई है। अब दवा की ‘सप्लाई चेन’ पर नजर रखना आसान हो गया है।
2. Ayush Suraksha Portal (आयुष सुरक्षा): उपभोक्ताओं का रक्षक
मई 2025 में लॉन्च किया गया यह पोर्टल सीधे जनता की सुरक्षा से जुड़ा है।
  • फार्माकोविजिलेंस: अगर किसी आयुष दवा से कोई साइड इफेक्ट (ADR) होता है, तो यहाँ रिपोर्ट की जा सकती है।
  • भ्रामक विज्ञापन: आयुष के नाम पर झूठे दावे करने वाले विज्ञापनों की शिकायत यहाँ दर्ज होती है, जिस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।

आगे की राह

गांधीनगर की इस बैठक में तय किया गया कि सभी राज्य इन पोर्टल्स का डेटा रीयल-टाइम में अपडेट करेंगे। इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा—उन्हें केवल वही दवाएं मिलेंगी जो मानकों पर खरी उतरती हैं और सुरक्षित हैं। आयुष मंत्रालय का यह कदम पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक ‘डिजिटल गवर्नेंस’ के सांचे में ढालने का एक बड़ा प्रयास है।

(स्रोत: आयुष मंत्रालय आधिकारिक X पोस्ट (@moayush) एवं प्रेस विज्ञप्ति – 10 जनवरी 2026)

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