नई दिल्ली में ‘Yoga Connect 2025’ का आगाज: सरकार ने जारी की ‘योग प्रभाव’ (Yoga Prabhava) रिपोर्ट, 10 साल के रिसर्च का लेखा-जोखा
नई दिल्ली: आयुष मंत्रालय ने योग को केवल ‘आस्था’ का विषय न रखकर अब पूरी तरह ‘डेटा’ और ‘विज्ञान’ से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में आयोजित हाइब्रिड ग्लोबल समिट “Yoga Connect 2025” में केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने “योग प्रभाव” (Yoga Prabhava) नामक एक ऐतिहासिक रिपोर्ट जारी की है।
क्या है ‘योग प्रभाव’ रिपोर्ट? केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRYN) द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट पिछले एक दशक (2014-2024) में योग के जमीनी असर का वैज्ञानिक आकलन है। इसमें बताया गया है कि कैसे योग ने भारत में गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases) जैसे डायबिटीज और हाइपरटेंशन की रोकथाम में भूमिका निभाई है।
समिट की 3 बड़ी बातें:1
- वैज्ञानिक विश्लेषण: समिट में “Scientometric Analysis of Yoga Research” रिपोर्ट भी पेश की गई, जो बताती है कि दुनिया भर में योग पर हो रहे रिसर्च में भारत की हिस्सेदारी कितनी बढ़ी है। औषधीय महत्व को रेखांकित करती है।
- भारतीय वृक्ष वैभव: इस मौके पर “भारतीय वृक्ष वैभवम” (Bhartiya Vriksha Vaibhavam) पुस्तिका का विमोचन किया गया, जो भारतीय मूल के पेड़ों और उनके औषधीय महत्व को रेखांकित करती है।
- वैश्विक भागीदारी: इस समिट में 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और हजारों वर्चुअल प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें दुनिया के शीर्ष योग शोधकर्ता शामिल थे।
आयुष्य पथ’ का नज़रिया: यह रिपोर्ट उन आलोचकों के लिए एक जवाब है जो योग को ‘स्यूडो-साइंस’ (Pseudo-science) कहते थे। सरकार का यह डेटा-ड्रिवन एप्रोच योग को वैश्विक स्वास्थ्य नीति (Global Health Policy) का हिस्सा बनाने में मदद करेगा।

