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ज्वार (Sorghum): डायबिटीज व हार्ट का वैज्ञानिक कवच | Ayush Path

Scientific Benefits of Jowar (Sorghum): Diabetes and Heart Health

‘सुपरफूड’ ज्वार का वैज्ञानिक विश्लेषण: डायबिटीज और हार्ट के लिए क्यों है अमृत? नई रिसर्च का खुलासा

नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026 (आयुष्य पथ न्यूज): गेहूँ और चावल के वर्चस्व वाले दौर में एक बार फिर भारत का पारंपरिक अनाज ‘ज्वार’ (Sorghum) वैज्ञानिक चर्चा के केंद्र में है। पोषण वैज्ञानिकों और डायटीशियंस ने इसे केवल ‘गरीबों का अनाज’ मानने से इनकार करते हुए 21वीं सदी का ‘न्यूट्री-सीरियल’ (Nutri-Cereal) घोषित किया है।

हालिया शोध और Journal of Food Science and Technology में प्रकाशित डेटा के अनुसार, ज्वार में ऐसे बायो-एक्टिव कंपाउंड्स मिले हैं जो डायबिटीज, हृदय रोग और मोटापे (Obesity) के खिलाफ एक ढाल का काम करते हैं।

ज्वार (Sorghum) ही क्यों? विज्ञान की नजर से

ज्वार ग्लूटेन-फ्री (Gluten-Free) अनाज है, जो इसे सीलिएक डिजीज (Celiac Disease) या ग्लूटेन सेंसिटिविटी वाले लोगों के लिए गेहूँ का सबसे बेहतरीन विकल्प बनाता है। लेकिन इसकी खूबियां यहीं खत्म नहीं होतीं:

1. डायबिटीज का ‘नेचुरल इंसुलिन मैनेजर’

वैज्ञानिकों के अनुसार, ज्वार एक जटिल कार्बोहाइड्रेट (Complex Carbohydrate) है।

  • धीमा पाचन: सामान्य गेहूँ की रोटी के मुकाबले ज्वार धीरे पचता है, जिससे खून में शुगर (Glucose) की मात्रा एकदम से नहीं बढ़ती (Low Glycemic Index)।
  • रिसर्च का दावा: नियमित ज्वार के सेवन से टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में प्लाज्मा ग्लूकोज लेवल और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार देखा गया है।

2. हार्ट हेल्थ और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल

ज्वार में पॉलीकोसैनोल्स (Policosanols) नामक तत्व पाए जाते हैं। शोध बताते हैं कि ये तत्व लीवर में कोलेस्ट्रॉल के संश्लेषण को नियंत्रित करते हैं, जिससे ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ (LDL) कम होता है और हार्ट अटैक का खतरा घटता है।

3. कैंसर से लड़ने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स

ज्वार की बाहरी परत में टैनिन (Tannins), फेनोलिक एसिड और एंथोसाइनिन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं।

“प्रयोगशाला अध्ययनों में पाया गया है कि ज्वार के एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में फ्री रेडिकल्स को बेअसर करते हैं, जिससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है। यह प्रक्रिया कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने और एजिंग (बुढ़ापे) को धीमा करने में सहायक है।”

4. फाइबर का पावरहाउस: गट हेल्थ (Gut Health)

एक कप ज्वार में लगभग 12 ग्राम फाइबर होता है, जो दैनिक आवश्यकता का लगभग 48% है। यह न केवल कब्ज दूर करता है, बल्कि आंतों में ‘गुड बैक्टीरिया’ के लिए प्रीबायोटिक (Prebiotic) का काम करता है।

आयुर्वेद का दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार, ज्वार (यवनाल) की तासीर ठंडी (शीत) होती है और यह स्वभाव से हल्का (लघु) और रूखा (रुक्ष) होता है।

  • कफ-पित्त नाशक: यह कफ और पित्त दोष को संतुलित करता है।
  • वजन घटाने में सहायक: अपनी रुक्षता (Dryness) के कारण यह शरीर से अतिरिक्त क्लेद (Fluid Retention) और चर्बी को सोखने में मदद करता है।

पर्यावरण का मित्र (Climate-Smart Crop)

वैज्ञानिक दृष्टि से ज्वार भविष्य की फसल है। इसे उगने के लिए चावल या गन्ने के मुकाबले बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। बढ़ते तापमान (Global Warming) के बीच यह सूखा-प्रतिरोधी (Drought-tolerant) फसल खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञ की सलाह

न्यूट्रिशनिस्ट सलाह देते हैं कि ज्वार को अपनी डेली डाइट में शामिल करें। आप इसकी रोटी, दलिया, या सूप बना सकते हैं। सर्दियों और बारिश में ज्वार का सेवन विशेष रूप से लाभकारी है।

स्वस्थ भारत के लिए अपनी थाली में लौटाइए ज्वार की मिठास।


रिपोर्ट: आयुष्य पथ साइंस डेस्क | स्रोत: ICAR & Nutritional Research Studies

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