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WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा सम्मेलन 2025: पीएम मोदी ने दिया ‘दिल्ली घोषणा’ और संतुलन का मंत्र

WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन 2025: पीएम मोदी ने दिया ‘संतुलन’ का वैश्विक मंत्र, ‘दिल्ली घोषणा’ ऐतिहासिक रूप से अपनाई गई

“संतुलन ही स्वास्थ्य का सार है। आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों का उत्तर हमारी प्राचीन विरासत में छिपा है।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली | 21 दिसंबर 2025

भारत ने वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है। 19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के भव्य ‘भारत मंडपम’ में द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन (2nd WHO Global Summit on Traditional Medicine) का समापन हुआ। इस समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान केवल दवाओं में नहीं, बल्कि जीवन के ‘संतुलन’ (Balance) में छिपा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और आयुष मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस तीन दिवसीय महाकुंभ (17-19 दिसंबर) में 175 से अधिक देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया।


“संतुलन ही स्वास्थ्य का सार है”: पीएम मोदी का संबोधन

शिखर सम्मेलन की थीम “Restoring Balance: The Science and Practice of Health and Well-being” पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने आधुनिक जीवनशैली की विसंगतियों पर गहरा प्रहार किया। उन्होंने आयुर्वेद के सिद्धांतों को आधुनिक संदर्भ में रखते हुए कहा:

“आज हम शारीरिक, मानसिक और पर्यावरणीय असंतुलन से जूझ रहे हैं। काम और जीवन, आहार और पोषण, नींद और जागरण—इन सभी में संतुलन बिगड़ गया है। यही असंतुलन मधुमेह, हृदय रोग, अवसाद और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की जड़ है। आयुर्वेद कहता है—संतुलन ही स्वास्थ्य का सार है।”

🌍 शिखर सम्मेलन की 5 बड़ी उपलब्धियां (Key Outcomes)

इस सम्मेलन में पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने के लिए कई क्रांतिकारी घोषणाएं की गईं:

1. ऐतिहासिक ‘दिल्ली घोषणा’ (Delhi Declaration)

सम्मेलन का सबसे बड़ा परिणाम ‘दिल्ली घोषणा’ को अपनाना रहा। इसके तहत दुनिया के देशों ने पारंपरिक चिकित्सा को साझा ‘जैव-सांस्कृतिक विरासत’ माना। इसमें WHO की वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025-2034 के तहत साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) चिकित्सा, कड़े नियमन और एकीकरण पर सहमति बनी।

2. पारंपरिक चिकित्सा ग्लोबल लाइब्रेरी (Global Library)

एक वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया गया, जो दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के वैज्ञानिक डेटा, पांडुलिपियों और नीति दस्तावेजों को संरक्षित करेगा।

3. ‘आयुष मार्क’ और MAISP पोर्टल

गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘Ayush Mark’ लॉन्च किया गया, जो उत्पादों की शुद्धता का वैश्विक मानक बनेगा। साथ ही, My Ayush Integrated Services Portal (MAISP) की शुरुआत की गई।

4. अश्वगंधा पर स्मारक डाक टिकट

कोविड-19 के दौरान दुनिया ने जिस भारतीय जड़ी-बूटी ‘अश्वगंधा’ की शक्ति को पहचाना, उसके सम्मान में प्रधानमंत्री ने एक विशेष स्मारक डाक टिकट (Commemorative Stamp) जारी किया।

5. एकीकृत कैंसर देखभाल

एकीकृत कैंसर देखभाल (Integrated Cancer Care) में पारंपरिक चिकित्सा को शामिल करने की रूपरेखा तैयार की गई, जिससे मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सके।

भविष्य की तैयारी: तकनीक और परंपरा का संगम

प्रधानमंत्री ने भविष्य की चुनौतियों, विशेष रूप से AI और रोबोटिक्स के युग में घटते शारीरिक श्रम पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद हमें तकनीकी युग में भी ‘इंसान’ बने रहने में मदद करेंगे। इस दौरान “From Roots to Global Reach: 11 Years of Transformation in Ayush” पुस्तक और योग पर WHO की तकनीकी रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया।

साथ ही, BIMSTEC देशों के लिए उत्कृष्टता केंद्र और जापान के साथ रणनीतिक सहयोग की घोषणा भी की गई।

आयुष्य पथ का नजरिया

यह शिखर सम्मेलन सिद्ध करता है कि भारत अब केवल दुनिया की ‘फार्मेसी’ नहीं, बल्कि ‘वेलनेस कैपिटल’ बन रहा है। परंपरा और तकनीक का यह संगम 21वीं सदी में स्वास्थ्य की नई परिभाषा लिख रहा है। यह विकास आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पटल पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

स्वस्थ रहें, संतुलित रहें!

संदर्भ (Sources):
  • प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO India): Official Release
  • प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB): Press Release
  • WHO Director-General’s Remarks (19 Dec 2025).
  • The Hindu & NDTV Reports (20-21 Dec 2025).

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