NIA पंचकूला: पंचकर्म पद्धति वैश्विक स्तर पर बना रही पहचान
आयुर्वेद की पंचकर्म पद्धति वैश्विक स्तर पर बना रही है पहचान: सतीश गंधर्व
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), पंचकूला में आयुर्वेद के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। सत्र 2025-26 के लिए ‘पंचकर्म टेक्नीशियन सर्टिफिकेट कोर्स’ के प्रथम बैच का भव्य इंडक्शन प्रोग्राम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के डीन प्रभारी प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने विधिवत रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
पंचकर्म: केवल उपचार नहीं, पुनरुत्थान की वैज्ञानिक प्रक्रिया
प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयुर्वेद की पंचकर्म पद्धति को अब वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। उन्होंने जोर दिया कि यह चिकित्सा पद्धति केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे शरीर के पुनरुत्थान की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया माना जाता है। आधुनिक जीवनशैली, प्रदूषण और मानसिक तनाव के कारण बढ़ रहे रोगों के बीच पंचकर्म एक सुरक्षित और दीर्घकालिक समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है।
संस्थान के उप चिकित्सा अधीक्षक (DMS) डॉ. गौरव गर्ग ने छात्रों को मंत्र देते हुए कहा कि चिकित्सा के साथ-साथ रोगियों के साथ किया गया अच्छा व्यवहार ही सबसे महत्वपूर्ण उपचार माना जाता है। उन्होंने बताया कि पंचकर्म के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं और यह कोर्स युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर
कोर्स इंचार्ज डॉ. अनुराग कुशल ने बताया कि कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा के मार्गदर्शन में शुरू किया गया यह एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ के युवाओं के लिए आयुर्वेद से जुड़ने का सुनहरा अवसर है। विद्यार्थियों को पंचकर्म की पारंपरिक तकनीकों के साथ-साथ आधुनिक कौशल भी प्रदान किया जाएगा।

