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आयुष कूटनीति’ की नई मिसाल: भारत मंडपम में 16 देशों के साथ महामंथन, वैश्विक मंच पर गूंजा भारतीय चिकित्सा का डंका

‘आयुष कूटनीति’ की नई मिसाल: भारत मंडपम में 16 देशों के साथ महामंथन, वैश्विक मंच पर गूंजा भारतीय चिकित्सा का डंका | Ayushya Path

‘आयुष कूटनीति’ की नई मिसाल: भारत मंडपम में 16 देशों के साथ महामंथन, वैश्विक मंच पर गूंजा भारतीय चिकित्सा का डंका

भारत ने अपनी ‘स्वास्थ्य कूटनीति’ (Health Diplomacy) को एक नई धार दी है। हाल ही में नई दिल्ली के भारत मंडपम में संपन्न हुए द्वितीय डब्ल्यूएचओ (WHO) वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने दुनिया के 16 प्रमुख देशों के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें आयोजित कीं।

केंद्रीय आयुष मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज (5 जनवरी 2026) इन बैठकों के परिणामों को साझा करते हुए कहा, “ये बैठकें केवल चर्चा नहीं थीं, बल्कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में एक ठोस कदम थीं।”

🌍 किन देशों के साथ हुई चर्चा?
अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मलेशिया, यूएई, थाईलैंड, ब्राजील, फिजी, माइक्रोनेशिया, सूरीनाम, मॉरीशस, मिस्र, वियतनाम, क्यूबा और मेक्सिको।

बैठकों के प्रमुख परिणाम (Key Outcomes)

इन द्विपक्षीय वार्ताओं में शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधान, आयुष चेयर की स्थापना और फार्माकोपिया (औषधि मानकों) की मान्यता पर सहमति बनी। कुछ प्रमुख समझौते इस प्रकार हैं:

🇳🇵 भारत-नेपाल अनुसंधान सहयोग, व्यापार और आयुष उत्पादों की मान्यता पर व्यापक चर्चा।
🇦🇪 भारत-यूएई आयुष फार्माकोपिया की मान्यता और यूएई के नागरिकों के लिए आयुष छात्रवृत्ति पर प्रगति।
🇲🇾 भारत-मलेशिया जड़ी-बूटियों की खेती और संयुक्त अनुसंधान पर उन्नत कार्य योजना।
🇻🇳 भारत-वियतनाम आयुष चेयर और ‘आयुष सूचना सेल’ स्थापित करने के लिए MoU को अंतिम रूप दिया गया।
🇲🇺 भारत-मॉरीशस उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) की स्थापना पर फोकस।
🇨🇺 भारत-क्यूबा ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) के तहत शैक्षणिक और नियामक सहयोग मजबूत करने पर सहमति।

वैश्विक रणनीति का हिस्सा

मंत्रालय के अनुसार, ये प्रयास WHO की पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025-2034 के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना है।

श्री जाधव ने कहा कि आयुष समझौतों (MoUs) का विस्तार यह साबित करता है कि दुनिया अब भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक सतत (Sustainable) विकल्प मान रही है।

(स्रोत: आयुष मंत्रालय, भारत सरकार – 5 जनवरी 2026)

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