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हरड़ (हरीतकी): एक औषधि जो ‘माँ’ से भी बढ़कर है, जानें 8 चमत्कारी आयुर्वेदिक प्रयोग

हरड़ (हरीतकी) के 8 चमत्कारी प्रयोग
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हरड़ (हरीतकी): एक औषधि जो ‘माँ’ से भी बढ़कर है, जानें 8 चमत्कारी प्रयोग

आयुर्वेद के विशाल ग्रंथालय में यदि किसी एक जड़ी-बूटी को ‘औषधियों का राजा’ कहा जा सकता है, तो वह हरीतकी (हरड़) है। महर्षियों ने इसकी तुलना सगी ‘माँ’ से की है। उनका मानना है कि एक बार माँ अपने बच्चे पर क्रोध कर सकती है, लेकिन पेट में गई हुई हरड़ कभी अहित नहीं करती।

“हरीतकी सदा पथ्या मातेव हितकारिणी।
कदाचित् कुप्यते माता नोदरस्था हरीतकी॥”
अर्थ: हरीतकी (हरड़) सदा ही पथ्यस्वरूपा है, वह माता के समान हित करने वाली है। माता कभी कोप (गुस्सा) भी कर सकती है, किंतु सेवन की गई हरीतकी कभी भी कुपित नहीं होती, वह सदा हित ही करती है।

हरड़ के 8 अचूक आयुर्वेदिक प्रयोग

1. उदर शुद्धि (नमक के साथ) नमक के साथ हरड़ खाने से रोगी का उदर सदा शुद्ध रहता है।
सावधानी: हरड़ के चूर्ण में नमक का भाग बहुत कम (नाममात्र) मिलाना चाहिए। ज्यादा नमक मिलाने पर यह दस्तावर हो जाएगा।
2. हृदय रोग (घी के साथ) गाय के घी के साथ हरड़ का चूर्ण चाटने से हृदय रोग नहीं होता और दिल को बल मिलता है।
3. शक्ति वर्धक (शहद के साथ) प्रतिदिन प्रातः शहद के साथ हरड़ का चूर्ण चाटने पर शारीरिक शक्ति (ओज) बढ़ती है।
4. कब्ज निवारण (दूध और शक्कर) सोते समय शक्कर और हरड़ का चूर्ण मिलाकर गर्म दूध के साथ लेने से सुबह पेट साफ रहता है।
5. स्मरण शक्ति (मक्खन-मिस्त्री) हरड़ के चूर्ण को मक्खन और मिस्त्री के साथ चाटने से मेधा-शक्ति बढ़ती है तथा याददाश्त (Memory) श्रेष्ठ होती है।
6. श्वासरोग और खाँसी (गोमूत्र हरीतकी) बड़ी हरड़ (जवाहरड़) को गोमूत्र में भिगोकर, नमक लगाकर मिट्टी के तवे पर धीमी आंच पर 2-3 घंटे सेकें। सेकने से हरड़ हल्की हो जाएगी। इसे डिब्बे में भर लें। दिन में तीन बार एक-एक हरड़ चूसने से दमा और खाँसी मिटती है।
7. नेत्र ज्योति (घी और दूध) जिसकी आंखें कमजोर हों, उसे प्रतिदिन बड़ी हरड़ घी के साथ चाटनी चाहिए और ऊपर से मिस्त्री-युक्त गाय का दूध पीना चाहिए। इससे आंखों की ज्योति ठीक होती है।
8. दीर्घायु योग (पंचगव्य) पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर रस) के साथ हरड़ का चूर्ण सेवन करने वाला व्यक्ति दीर्घायु होता है।
नोट: हरड़ की तासीर थोड़ी रूखी (Dry) होती है। गर्भवती महिलाओं और बहुत दुबले व्यक्तियों को इसका सेवन वैद्य की सलाह से करना चाहिए।
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