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AMR का मुकाबला: ‘एंटीबायोटिक्स पर निर्भरता घटाएं, प्रतिरक्षा बढ़ाएं’—आयुष मंत्रालय का ‘वन हेल्थ’ ब्लूप्रिंट जारी

AMR का मुकाबला: ‘एंटीबायोटिक्स पर निर्भरता घटाएं, प्रतिरक्षा बढ़ाएं’—आयुष मंत्रालय का ‘वन हेल्थ’ ब्लूप्रिंट जारी | Ayushya Path

AMR का मुकाबला: ‘एंटीबायोटिक्स पर निर्भरता घटाएं, प्रतिरक्षा बढ़ाएं’—आयुष मंत्रालय का ‘वन हेल्थ’ ब्लूप्रिंट जारी

चिकित्सा विज्ञान ने पिछले 100 वर्षों में जो प्रगति की है, वह आज एक गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ी है। इस संकट का नाम है—एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR)। यह वह स्थिति है जब बैक्टीरिया और वायरस पर दवाओं (एंटीबायोटिक्स) का असर होना बंद हो जाता है।

इस ‘साइलेंट पैंडेमिक’ से निपटने के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने एक रणनीतिक दस्तावेज पेश किया है। मंत्रालय ने NAP-AMR 2.0 (National Action Plan on AMR 2025-2029) के तहत आयुष प्रथाओं को मुख्यधारा में एकीकृत करने पर जोर दिया है।

🚨 समस्या क्या है?
हल्के-फुल्के संक्रमण में भी एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग बैक्टीरिया को ‘सुपरबग’ बना रहा है। आयुष मंत्रालय का तर्क है कि यदि हम शरीर की अपनी प्रतिरक्षा (Immunity) को मजबूत कर लें, तो एंटीबायोटिक्स की जरूरत ही कम हो जाएगी।

आयुष का ‘प्रिवेंटिव प्रोटोकॉल’ (रोकथाम ही बचाव है)

मंत्रालय की गाइडलाइंस स्पष्ट करती हैं कि आयुर्वेद और योग का उद्देश्य संक्रमण होने के बाद इलाज करना नहीं, बल्कि संक्रमण को होने से रोकना है। यह ‘वन हेल्थ अप्रोच’ (One Health Approach) का हिस्सा है।

1. योग: प्रतिरक्षा का वैज्ञानिक आधार[Image of Yoga Asana Diagram]

गाइडलाइंस में योग को केवल व्यायाम नहीं, बल्कि ‘इम्यूनो-मॉड्यूलेटर’ (प्रतिरक्षा नियामक) माना गया है।

  • प्राणायाम (श्वसन तकनीक): भ्रामरी, अनुलोम-विलोम और उज्जायी प्राणायाम नाइट्रिक ऑक्साइड (Nitric Oxide) का उत्पादन बढ़ाते हैं, जो नेजल पैसेज में ही वायरस और बैक्टीरिया को रोकने में मदद करता है।
  • आसन: मत्स्यासन (थाइमस ग्रंथि को सक्रिय करने के लिए), शशांकासन (तनाव कम करने के लिए) और भुजंगासन (फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए)।
  • वैज्ञानिक तर्क: तनाव हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ इम्यूनिटी को कमजोर करता है। नियमित योग कोर्टिसोल को कम कर शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है।

2. आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा: एंटीबायोटिक्स का विकल्प?

आयुर्वेद एंटीबायोटिक्स को रिप्लेस नहीं करता, लेकिन उनकी आवश्यकता को कम (Reduce) करता है। मंत्रालय ने निम्नलिखित प्राकृतिक उपायों को ‘फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस’ के रूप में सुझाया है:

  • रसायन औषधियां: गिलोय (गुडूची), अश्वगंधा और आंवला। ये शरीर में ‘ओजस’ (Vitality) बढ़ाते हैं।
  • हल्दी (Curcumin): यह एक प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल एजेंट है। ‘गोल्डन मिल्क’ का सेवन संक्रमण रोकने में सहायक है।
  • दिनचर्या: ब्रह्म मुहूर्त में जागना, ऋतुचर्या का पालन और सात्विक आहार।
  • क्रियाएं: ‘कवल-गंडूष’ (Oil Pulling) और ‘जल नेति’—ये ऊपरी श्वसन तंत्र (Upper Respiratory Tract) से रोगाणुओं को हटाते हैं।
नीतिगत निष्कर्ष:
“आयुष प्रणालियां संक्रमण की आवृत्ति (Frequency of Infection) को कम करती हैं। जब संक्रमण कम होंगे, तो एंटीबायोटिक्स का सेवन स्वतः कम हो जाएगा, जिससे AMR का खतरा घटेगा। यह वैश्विक स्वास्थ्य संकट का सबसे प्रभावी और टिकाऊ समाधान है।” — आयुष मंत्रालय

(मूल स्रोत: आयुष मंत्रालय आधिकारिक वेबसाइट, NAP-AMR 2.0 दस्तावेज एवं NCDC गाइड्लाइंस – जनवरी 2026)

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