भारत में बचपन का मोटापा: वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 की रिपोर्ट

आयुष्य पथ – विशेष स्वास्थ्य रिपोर्ट
साइलेंट इमरजेंसी: बचपन के मोटापे में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर, अमेरिका को भी पीछे छोड़ा
विश्व मोटापा दिवस (4 मार्च 2026): ‘वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस’ की चौंकाने वाली रिपोर्ट
नई दिल्ली: भारत इस समय एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की दहलीज पर खड़ा है। 4 मार्च 2026 को जारी ‘वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026’ के अनुसार, भारत बच्चों में मोटापे और ओवरवेट के मामलों में चीन के बाद वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि भारत ने इस मामले में अमेरिका जैसे विकसित देशों को भी पीछे छोड़ दिया है।
भारत: मोटापा एवं ओवरवेट (5-19 वर्ष)
| आयु वर्ग | प्रभावित बच्चे (हाई BMI) |
|---|---|
| 5-9 वर्ष | 1.49 करोड़ |
| 10-19 वर्ष | 2.64 करोड़ |
| कुल (भारत) | 4.1 करोड़ से अधिक |
2040 तक का डरावना अनुमान
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वर्तमान जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो 2040 तक भारत में पूरी तरह मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या 2 करोड़ के पार पहुंच जाएगी। इससे भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का बोझ कई गुना बढ़ जाएगा।
आयुष्य पथ का सुझाव: रोकथाम के उपाय
- जंक फूड और शुगर युक्त ड्रिंक्स पर सख्त ‘शुगर टैक्स’ की आवश्यकता।
- स्कूली पाठ्यक्रम में शारीरिक गतिविधि और अनिवार्य खेल समय।
- अभिभावकों द्वारा भोजन को ‘रिवॉर्ड’ के रूप में देने की प्रवृत्ति का त्याग।
स्रोत: वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन रिपोर्ट 2026

