बसंत पंचमी 2026: आयुर्वेद और योग से करें शरीर का ‘कायाकल्प’ | Health Special
बसंत पंचमी: केवल ऋतु परिवर्तन नहीं, ‘कायाकल्प’ का महापर्व है 🌼
प्रकृति ने अपनी चादर बदल ली है। खेतों में सरसों के पीले फूल और हवाओं में मादक उष्णता बता रही है कि ‘ऋतुराज बसंत’ आ चुका है। लेकिन क्या बसंत का अर्थ केवल पीले वस्त्र पहनना है?
आयुर्वेद की दृष्टि में, यह समय हमारे शरीर के ‘पुनर्जागरण’ (Renaissance) का है। सर्दियों में जमा हुआ ‘कफ दोष’ अब सूर्य की गर्मी से पिघलने लगा है। यदि इसे बाहर न निकाला जाए, तो यह वसंत में होने वाले रोगों का कारण बनता है।
बसंती और ‘बस्ती’ का संगम
यहीं पर आयुर्वेद की बस्ती (Vasti) चिकित्सा काम आती है। यह पंचकर्म का वह मुकुटमणि है जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर हमें नवजीवन देता है। साथ ही, यह समय ‘स्वर्ण बसंत मालती’ जैसी रसायन औषधियों और पीले रंग (मणिपुर चक्र) की ऊर्जा को अपनाने का है।
“जब तन निरोगी होगा और मन में उत्साह होगा, तभी जीवन में सच्चा वसंत खिलेगा।”
प्रकृति की गोद में बसंती ऊर्जा का उत्सव।🧘♂️ बसंत पंचमी विशेष: ‘सरस्वती-प्राण’ योग सत्र
सुस्ती (Lethargy) भगाने और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की ऊर्जा जगाने के लिए विशेष अभ्यास:
आंखें बंद करें और नाभि (मणिपुर चक्र) पर ध्यान लगाएं। कल्पना करें कि वहां एक चमकीला पीला सूरज चमक रहा है जो आपको तेजस्वी बना रहा है।
