ब्रश करने के बाद ‘कुल्ला’ करना न भूलें: आयुष मंत्रालय ने ‘कवल धारण’ को बताया मुंह और फेफड़ों का रक्षक
ब्रश करने के बाद ‘कुल्ला’ करना न भूलें: आयुष मंत्रालय ने ‘कवल धारण’ को बताया मुंह और फेफड़ों का रक्षक
नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (08 जनवरी 2026)क्या आप जानते हैं कि केवल ब्रश करना आपके मुंह की पूरी सफाई के लिए काफी नहीं है? भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने आज एक महत्वपूर्ण सलाह जारी करते हुए लोगों को अपनी सुबह की दिनचर्या में एक छोटा सा बदलाव करने को कहा है। मंत्रालय ने सिफारिश की है कि ब्रश करने के बाद ‘कवल धारण’ (Oil Pulling) को दैनिक आदत बना लें।
यह प्राचीन आयुर्वेदिक विधि न केवल ओरल हाइजीन (Oral Hygiene) के लिए वरदान है, बल्कि यह आपके श्वसन तंत्र (Respiratory Health) को भी मजबूत बनाती है।
क्या है कवल धारण और इसे कैसे करें?
आयुर्वेद में तेल का कुल्ला करने की विधि को ‘कवल धारण’ या ‘गंडूष’ कहा जाता है। मंत्रालय ने इसके लिए विशेष रूप से तिल के तेल (Sesame Oil) का उपयोग करने की सलाह दी है।
सुबह ब्रश करने के बाद, एक चम्मच तिल का तेल मुंह में भरें। इसे 2-3 मिनट तक मुंह के चारों तरफ घुमाएं (Swish करें), जैसे आप पानी से कुल्ला करते हैं। ध्यान रहे, इसे निगलना नहीं है। अंत में इसे थूक दें और गर्म पानी से मुंह धो लें।
इसके चमत्कारी लाभ
मंत्रालय के अनुसार, यह छोटी सी आदत आपके स्वास्थ्य में बड़े बदलाव ला सकती है:
- बैक्टीरिया का खात्मा: तेल मुंह के कोने-कोने से हानिकारक बैक्टीरिया को खींचकर बाहर निकाल देता है, जो ब्रश की पहुंच से दूर होते हैं।
- मजबूत मसूड़े: यह मसूड़ों की सूजन कम करता है और दांतों को हिलने से रोकता है।
- सांसों की ताजगी: मुंह की दुर्गंध (Bad Breath) को जड़ से खत्म करने का यह सबसे कारगर उपाय है।
- श्वसन सुरक्षा: सबसे खास बात यह है कि यह गले और श्वास नली को भी साफ रखता है, जिससे फेफड़ों की सुरक्षा होती है और संक्रमण का खतरा कम होता है।
आयुष मंत्रालय का संदेश साफ है—”यह छोटी आदत, बड़ा बदलाव लाती है।” (Small habit, Big change)।
(स्रोत: आयुष मंत्रालय आधिकारिक X पोस्ट (@moayush), दिनांक 8 जनवरी 2026 (पोस्ट ID: 2009189659159744937))

