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आंध्र प्रदेश: अब आयुर्वेदिक डॉक्टर भी कर सकेंगे सर्जरी, सरकार का ऐतिहासिक फैसला

आंध्र प्रदेश में आयुर्वेदिक सर्जरी की अनुमति

आंध्र प्रदेश: आयुर्वेद के लिए ऐतिहासिक दिन, अब पीजी डॉक्टर कर सकेंगे स्वतंत्र सर्जरी, सरकार ने दी मंजूरी

विजयवाड़ा/अमरावती | आयुष्य पथ समाचार

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को मुख्यधारा में लाने की दिशा में आंध्र प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री सत्या कुमार यादव ने 23 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर राज्य के आयुर्वेदिक चिकित्सकों को विशिष्ट सर्जरी (शल्य चिकित्सा) करने की आधिकारिक अनुमति प्रदान कर दी है।

किन डॉक्टरों को मिली अनुमति?

आदेश के अनुसार, यह अनुमति शल्य तंत्र (सामान्य सर्जरी) और शलाक्य तंत्र (नेत्र, कान, नाक, गला, सिर एवं दंत चिकित्सा) में स्नातकोत्तर (PG) डिग्री प्राप्त एवं उचित प्रशिक्षण वाले आयुर्वेदिक डॉक्टरों को दी गई है।

कौन से ऑपरेशन कर सकेंगे? (NCISM 2020 विनियम के अनुसार)

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (NCISM) के दिशानिर्देशों के तहत इन्हें निम्नलिखित अधिकार मिले हैं:

  • शल्य तंत्र (39 प्रक्रियाएं): घावों का उपचार, सिवनी (Suturing), बवासीर, फिशर, सिस्ट हटाना, स्किन ग्राफ्टिंग आदि।
  • शलाक्य तंत्र (19 प्रक्रियाएं): मोतियाबिंद, ट्यूमर हटाना, और अन्य ENT सर्जरी।

इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा पर जोर

स्वास्थ्य मंत्री ने डॉ. एनआरएस सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज, विजयवाड़ा में शल्य एवं शलाक्य तंत्र के पीजी कोर्स तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, आवश्यक ऑपरेशन थिएटर एवं सर्जिकल उपकरण उपलब्ध कराने को कहा है ताकि यह कदम केवल कागजों तक सीमित न रहे।

मंत्री ने कहा कि यह निर्णय प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को आधुनिक उपचार विधियों के साथ एकीकृत करने में सहायक होगा और मरीजों को पारंपरिक एवं आधुनिक दोनों विकल्प उपलब्ध कराएगा।


संदर्भ: राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (NCISM) अधिनियम 2020, द हिंदू (23 दिसंबर 2025), आयुष मंत्रालय।
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