वैश्विक मंच पर भारत का डंका: WHO की ‘ICD-11’ लिस्ट में शामिल हुए आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी
वैश्विक मंच पर भारत का डंका: WHO की ‘ICD-11’ लिस्ट में शामिल हुए आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी, मिली ऐतिहासिक मान्यता
नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (02 जनवरी 2026)भारतीय चिकित्सा के इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी ‘अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण प्रणाली’ (International Classification of Diseases – ICD-11) के 2025 अपडेट में भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों—आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (ASU) को आधिकारिक स्थान दे दिया है।
इस फैसले के साथ ही भारत की पारंपरिक चिकित्सा अब ‘वैकल्पिक’ (Alternative) के दायरे से निकलकर वैश्विक ‘मुख्यधारा’ (Mainstream) का हिस्सा बनने की ओर अग्रसर है।
क्या है ICD-11 और इसका महत्व?
ICD-11 दुनिया भर में बीमारियों के निदान (Diagnosis) और रिपोर्टिंग का एक ग्लोबल स्टैंडर्ड है। अब तक इसमें केवल एलोपैथी (आधुनिक चिकित्सा) की शब्दावली होती थी।
डब्ल्यूएचओ ने अब ‘मॉड्यूल-2: पारंपरिक चिकित्सा स्थितियां’ (Traditional Medicine Conditions) के तहत आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी की शब्दावली और बीमारियों के डेटा को शामिल किया है।
अब दुनिया के किसी भी कोने में अगर कोई डॉक्टर आयुर्वेद के तरीके से इलाज करेगा, तो वह बीमारी को ‘बात-पित्त-कफ’ या यूनानी/सिद्ध की टर्मिनोलॉजी में आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड कर सकेगा। इससे इंश्योरेंस क्लेम और रिसर्च में बहुत आसानी होगी।
भारत के लिए बड़ी जीत
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह उपलब्धि रातों-रात नहीं मिली है। मंत्रालय ने डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर लंबे समय तक इस मॉड्यूल पर काम किया है। इसे “वर्ष के अंत की समीक्षा 2025” (Year End Review 2025) की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया गया है।
इस कदम के 3 बड़े फायदे:
- वैश्विक विश्वसनीयता: दुनिया भर के वैज्ञानिक और डॉक्टर अब भारतीय चिकित्सा के डेटा को समझ और स्वीकार कर सकेंगे।
- एकीकृत चिकित्सा (Integration): आधुनिक अस्पतालों में पारंपरिक चिकित्सा को लागू करना आसान होगा।
- पॉलिसी मेकिंग: साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) डेटा मिलने से सरकारों को स्वास्थ्य नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
यह कदम डब्ल्यूएचओ के ‘सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज’ (Universal Health Coverage) और सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में भी सहायक होगा। इससे लाखों लोगों को समग्र और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
(स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो – PIB एवं आयुष मंत्रालय विज्ञप्ति)

