वेट लॉस इंजेक्शन: ‘जादुई इलाज’ या सेहत के साथ खिलवाड़? डॉक्टरों ने जताई गंभीर चिंता
वेट लॉस इंजेक्शन की बढ़ती उपलब्धता पर डॉक्टरों की चिंता: साइड इफेक्ट्स और फेक दवाओं का खतरा
नई दिल्ली | आयुष्य पथ स्वास्थ्य डेस्क
भारत में मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज की महामारी तेजी से बढ़ रही है। यहां 77 मिलियन से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। इसी बीच, सेमाग्लूटाइड आधारित वेट लॉस इंजेक्शन (जैसे Ozempic, Wegovy) की मांग ने जोर पकड़ लिया है। दिसंबर 2025 में इनके भारत लॉन्च के बाद मची होड़ ने डॉक्टरों को चिंता में डाल दिया है।
कैसे काम करती हैं ये दवाएं?
ये GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाएं भूख को नियंत्रित करती हैं और इंसुलिन बढ़ाती हैं। लेकिन विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि ये “मैजिक पिल” नहीं हैं। बिना डॉक्टरी निगरानी के इनका इस्तेमाल जानलेवा हो सकता है।
डॉक्टरों की मुख्य चिंताएं और साइड इफेक्ट्स:
- मिसयूज: सोशल मीडिया के प्रभाव में लोग कॉस्मेटिक वेट लॉस के लिए बिना प्रिस्क्रिप्शन इसे ले रहे हैं।
- शारीरिक नुकसान: मतली, उल्टी, पैंक्रियाटाइटिस, गॉलब्लैडर की समस्याएं और दुर्लभ मामलों में थायरॉइड ट्यूमर का खतरा।
- मसल लॉस: फैट के साथ-साथ शरीर की ताकतवर मांसपेशियां भी खत्म होने लगती हैं।
- फेक दवाएं: ऑनलाइन खरीदे गए नकली इंजेक्शन से खून की उल्टी और पेट के पैरालिसिस के मामले सामने आए हैं।
लंबे समय तक निर्भरता का खतरा
सबसे बड़ी समस्या यह है कि दवा बंद करने पर 8 हफ्तों में ही वजन वापस बढ़ने लगता है। यह एक ऐसा चक्रव्यूह है जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों की सलाह
ये दवाएं केवल गंभीर मरीजों के लिए हैं। स्थायी वेट लॉस के लिए स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और लाइफस्टाइल बदलाव ही असली समाधान हैं।
“जल्दबाजी में कोई दवा न लें – डॉक्टर से सलाह जरूरी है। इंजेक्शन सिर्फ सहायक हो सकते हैं, स्वस्थ जीवनशैली का विकल्प नहीं।”
स्रोत: The Guardian, Times of India (दिसंबर 2025), NDTV Health एवं अन्य रिपोर्ट्स।

