एप्सटीन फाइल्स: भारतीय आयुर्वेद और तिल के तेल का जिक्र, 5000 साल पुरानी पद्धति की चर्चा
एप्सटीन फाइल्स खुलासा: भारतीय आयुर्वेद और ‘तिल के तेल’ से डिटॉक्स का जिक्र, 5000 साल पुरानी पद्धति पर पश्चिमी मुहर
न्यूयॉर्क | 21 दिसंबर 2025
अमेरिकी न्याय विभाग (US Justice Department) ने जेफ्री एप्सटीन से जुड़ी हजारों गोपनीय फाइलें सार्वजनिक कर दी हैं। जहां पूरी दुनिया की नजरें इसमें शामिल बड़े राजनेताओं और मशहूर हस्तियों के नामों पर हैं, वहीं इन दस्तावेजों में एक चौंकाने वाला खुलासा भारतीय आयुर्वेद और मसाज तकनीकों को लेकर भी हुआ है।
इन दस्तावेजों के एक प्रदर्शनी (Exhibit) हिस्से में शरीर की शुद्धि (Detoxification) के लिए भारतीय आयुर्वेदिक पद्धतियों को अत्यंत प्रभावी बताया गया है।
क्या लिखा है फाइलों में? (Ayurveda & Sesame Oil)
जारी किए गए दस्तावेजों में एक लेख शामिल है जिसका शीर्षक है—‘The Art of Giving Massage’। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है:
“पश्चिमी देशों में कई चिकित्सक अब इस 5000 साल पुरानी भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति पर आधारित मसाज और अन्य उपचार ऑफर कर रहे हैं।”
दस्तावेज में ‘तिल के तेल’ (Sesame Oil) का विशेष उल्लेख है। इसमें बताया गया है कि कैसे गर्म तिल के तेल से मालिश करने पर शरीर से विषाक्त पदार्थ (Toxins) बाहर निकलते हैं। आयुर्वेद में इस प्रक्रिया को ‘अभ्यंग’ (Abhyanga) कहा जाता है, जो वात दोष को संतुलित करने और शरीर को डिटॉक्स करने की प्राचीन विधि है।
ट्रंप, क्लिंटन और माइकल जैक्सन की तस्वीरें
यह फाइलें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले महीने साइन किए गए एक बिल के तहत जारी की गई हैं, जिसमें 30 दिनों के भीतर सच सामने लाने का आदेश था।
- फाइलों में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की कई तस्वीरें सामने आई हैं।
- दिवंगत पॉप स्टार माइकल जैक्सन और जेफ्री एप्सटीन की एक साथ फोटो भी मिली है।
- खुद डोनाल्ड ट्रंप की भी कुछ तस्वीरें मौजूद हैं। हालांकि, न्याय विभाग ने माना है कि यह रिलीज अभी पूरी नहीं है।
गौरतलब है कि ट्रंप और क्लिंटन पर एप्सटीन से जुड़े किसी अपराध का आरोप नहीं है। एप्सटीन, जिन पर नाबालिगों के शोषण के गंभीर आरोप थे, 2019 में जेल में आत्महत्या कर चुके थे।
आयुष्य पथ का विश्लेषण: विवादों के बीच ‘ज्ञान’ की पुष्टि
भले ही ये दस्तावेज एक विवादास्पद व्यक्ति से जुड़े हों, लेकिन इसमें आयुर्वेद का उल्लेख यह सिद्ध करता है कि भारतीय ज्ञान परंपरा की स्वीकार्यता कुलीन पश्चिमी समाज (Western Elite Society) में कितनी गहरी थी।
पश्चिमी दुनिया अब यह मान रही है कि केमिकल दवाओं से बेहतर ‘प्राकृतिक डिटॉक्स’ है। तिल का तेल, जो भारतीय घरों में आम है, उसे पश्चिम में एक ‘लग्जरी थेरेपी’ माना जाता है।
आयुर्वेद विज्ञान है, जिसका उद्देश्य केवल मानवता का कल्याण है। 🌿
- Amar Ujala: Report on Ayurveda in Epstein Files
- The Economic Times & NDTV (20 Dec 2025).
- PTI & US Justice Department Releases.
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