आयुष दवाओं की गुणवत्ता में होगा बड़ा सुधार: सरकार ने 108 लैब्स को दी टेस्टिंग की मंजूरी
आयुष दवाओं की गुणवत्ता में होगा बड़ा सुधार: सरकार ने 108 लैब्स को दी टेस्टिंग की मंजूरी, मिलावट पर लगेगा अंकुश
नई दिल्ली | आयुष्य पथ डेस्क (01 जनवरी 2026)भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों (आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी) की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में सरकार ने एक और ठोस कदम उठाया है। आयुष मंत्रालय ने देश भर में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 108 प्रयोगशालाओं (Laboratories) को टेस्टिंग के लिए मंजूरी दे दी है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाजार में उपलब्ध आयुष औषधियों को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों पर परखना और उपभोक्ताओं तक केवल उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद पहुंचाना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
अक्सर आयुष दवाओं पर यह सवाल उठते रहे हैं कि उनमें मानकीकरण (Standardization) की कमी है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया है।
- सख्त जांच: अब कच्चे माल (Raw Material) से लेकर तैयार उत्पाद (Finished Product) तक की जांच इन अनुमोदित लैब्स में की जाएगी।
- NABL एक्रेडिटेशन: इनमें से अधिकांश लैब्स NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) से मान्यता प्राप्त होंगी, जिससे इनकी रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य होगी।
जब दवाओं की क्वालिटी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी, तो भारत से आयुष दवाओं का निर्यात (Export) कई गुना बढ़ जाएगा। यह कदम हाल ही में लॉन्च किए गए ‘आयुष मार्क’ (Ayush Mark) को भी मजबूती प्रदान करेगा।
भविष्य की योजना
रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय का लक्ष्य केवल 108 लैब्स तक रुकना नहीं है। आने वाले समय में हर राज्य में ऐसी अत्याधुनिक लैब्स का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इससे न केवल घरेलू उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि ‘मेड इन इंडिया’ आयुष उत्पादों की साख पूरी दुनिया में मजबूत होगी।
यह निर्णय उन हजारों आयुष निर्माताओं के लिए भी एक संकेत है कि अब गुणवत्ता के साथ समझौता करने की कोई गुंजाइश नहीं है।
(स्रोत: डीडी न्यूज़ रिपोर्ट – मूल लेख यहाँ पढ़ें)

